कृषि दर्शन : संक्षिप्त परिचय 

कृषि यंत्रीकरण में सफलता की उड़ान
कृषि दर्शन : संक्षिप्त परिचय
 लहरों से डरकर नौका पर नहीं होती
कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती
श्री रमेशचंद पाटीदार
संस्थापक
बुलंद इरादों के धनी श्री रमेशचंद पाटीदार पर ये शेर एकदम मौजूद हैं।  .पेशे से किसान श्री रमेशचंद पाटीदार ने परम्परागत पुश्तैनी खेती के साथ ही इस क्षेत्र में कुछ ऐसा करने का सोचा सोचा जिससे खेती लाभ का धंधा बने और देश का  किसान खुशहाल हो।  केंद्र और राज्य सरकारे भी पिछले  वर्षो से खेती को लाभ का धंधा बनाने हेतु कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दे रही है। ताकि कम लागत में किसान अधिक फायदा कमाकर खुशहाल हो सके। और इसी सोच को कई पहले ही अंजाम देने का बीड़ा श्री रमेशचंद पाटीदार ने युवावस्था में ही उठा उठा लिया था।  लगातार २२ घंटे ट्रैक्टर चलाने वाले श्री रमेशचंद पाटीदार मध्यप्रदेश के बड़नगर (विक्रम  नगर मौलाना ) ने छोटे से गांव में वर्ष १९८८ में ही कृषि यंत्रो के निर्माण हेतु  कृषि दर्शन की नीव रख दी।  .शुरुआत एक कार्यशाला के रूप में की, जंहा पर खुद श्री रमेशचंद पाटीदार ने अपने साथी कारीगरों के साथ ट्राली बनाने का काम शुरू किया।  जैसा कि उक्त शेर से ही जाहिर है। कि जिस तरह अकेला साहिल (समुद्र का किनारा )अपने तट पर आठ कई तूफानों को पलटाता रहता  है। उसी तरह अथक व  लगन एव अपने जुनून के बलबूते उन्होंने